Hindi Lokbharati Chapter 14 Giridhar Naagar Solutions

Q1. दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए। हरि बिन कूण गती मेरी ।। तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी ।। आदि-अंत निज नाँव तेरो हीमायें फेरी । बेर-बेर पुकार कहूँ प्रभु आरति है तेरी ।। यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी । नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी ।। बिरहणि पिवकी बाट जौवै राखल्‍यो नेरी । दासी मीरा राम रटत है मैं सरण हूँ तेरी ।।

हे हरि, आपके बिना मेरा कौन है? अर्थात आपके सिवा मेरा कोई ठिकाना नहीं है। आप ही मेरा पालन करने वाले हैं और मैं आपकी दासी है। मैं रात-दिन, हर समय आपका ही नाम जपती रहती हूँ। मैं बार-बार आपको पुकारती हूँ, क्योंकि मुझे आपके दर्शनों की तीव्र लालसा है।विकारों से भरे इस भवसागर में मेरी नाव के पाल फट गए है और अब इस नाव को डूबने में समय नहीं लगेगा।हे प्रभु मेरी नाव के पाल बाँध दो। यह तुम्हारी (अपने प्रिय की ) ही राह देख रही है। मुझे अपनी शरण में ले लो। यह दासी मीरा तुम्हारे ही नाम की रट लगाए हुए है, तुम्हारी शरण में है। इसे बचाकर इसकी लाज रख लो।

Q2. इस अर्थ में आए शब्‍द लिखिए : अर्थ शब्‍द (१) दासी ______ (२) साजन ______ (३) बार-बार ______ (४) आकाश ______

अर्थ

शब्द

(१) दासी

चेरी

(२) साजन

पति

(३) बार-बार

बेर-बेर

(४) आकाश

अंबर

Q3. कन्हैया के नाम

Diagram: Refer textbook

Q4. कोष्‍ठक में दिए गए प्रत्‍येक/कारक चिन्ह से अलग-अलग वाक्‍य बनाइए और उनके कारक लिखिए : [ ने, को, से, का, की, के, में, पर, हे, अरे, के लिए ]

क्र. वाक्य कारक
१. राम ने मारा। कर्ता
२. राम ने रावण को मारा। कर्म
३. राम ने रावण को बाण से मारा। करण
४. राम का राज्याभिषेक १४ वर्ष बाद हुआ। संबंध
५. राम की पत्नी सीता थीं। संबंध
६. राम के प्रिय भाई भरत थे। संबंध
७. अलमारी में कपड़े व गहने रखे जाते हैं। अधिकरण
८. सड़क पर गाड़ियाँ दिन-रात दौड़ती रहती हैं। अधिकरण
९. हे ईश्वर! रक्षा करो। संबोधन
१०. अरे भाई! तुम अब आ रहे हो? संबोधन
११. माँ ने रूपक के लिए नए कपड़े खरीदे।  संप्रदान

Q5. निम्‍नलिखित शब्‍दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए तथा उचित शीर्षक दीजिए : अलमारी, गिलहरी, चावल के पापड़, छोटा बच्चा |

पशु प्रेमी चिंटू

जीव दया एक गाँव में एक छोटा बच्चा रहता था। उसका नाम चिंटू था। एक दिन चिंटू अपने घर के बाहर खेल रहा था। उसने देखा कि सामने एक पेड़ के नीचे दो-तीन कौए किसी चीज पर चोंच मार रहे हैं और वहाँ से हल्की-हल्की चीं-चीं की आवाज आ रही है। चिंटू दौड़कर वहाँ पहुँचा और उसने उन कौओं को वहाँ से उड़ाया। उसने देखा कि एक छोटी-सी गिलहरी वहाँ चीं-चीं कर रही थी। उसका शरीर कौओं की चोंच से घायल हो गया था। चिंटू ने अपनी जेब से रूमाल निकाला और डरे बिना धीरे से गिलहरी को उठा लिया।उसने घर के अंदर लाकर उसे पानी पिलाया, उसके घावों को साफ करके उन पर सोफ्रामाइसिन लगाई और उसे मेज पर बैठा दिया। गिलहरी कुछ देर बाद धीरे-धीरे मेज पर घूमने लगी। मेज पर एक प्लेट में चावल के पापड़ रखे थे। गिलहरी ने एक पापड़ उठाया और अपने अगले दोनों पंजों में पकड़कर धीरे-धीरे उसे खाने लगी। चिंटू को बहुत अच्छा लगा। उसने माँ से पूछा कि जब तक गिलहरी बिलकुल ठीक नहीं हो जाती क्या मैं उसे अपने पास रख सकता हूँ। अभी अगर वह बाहर जाएगी तो कौए उसे अपना आहार बना लेंगे। माँ को चिंटू की ऐसी सोच पर गर्व हुआ और उन्होंने खुशी-खुशी उसकी बात मान ली। चिंटू ने अपनी किताबों की खुली आलमारी के एक खाने में एक तौलिया बिछाकर गिलहरी को बैठा दिया। उसके पास चावल के कुछ पापड़ तथा अमरूद के कुछ टुकड़े रख दिए। तीन-चार दिन बाद जब गिलहरी अच्छी तरह दौड़ने लगी तो चिंटू ने उसे बाहर पेड़ पर छोड़ दिया।

सीख : हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया-भाव रखना चाहिए।

Q6. प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :

Diagram: Refer textbook

Q7. संजाल पूर्ण कीजिए :

Diagram: Refer textbook

Q8. सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए काम जरा लेकर देखो, सख्त बात से नहीं स्‍नेह से अपने अंतर का नेह अरे, तुम उसे जरा देकर देखो । कितने भी गहरे रहें गर्त, हर जगह प्यार जा सकता है, कितना भी भ्रष्‍ट जमाना हो, हर समय प्यार भा सकता है । जो गिरे हुए को उठा सके, इससे प्यारा कुछ जतन नहीं, दे प्यार उठा पाए न जिसे, इतना गहरा कुछ पतन नहीं ।। (भवानी प्रसाद मिश्र) अ) उत्‍तर लिखिए : किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्‍त - ______ हर समय अच्छी लगने वाली बात - ______ आ) उत्‍तर लिखिए : अच्छा प्रयत्‍न यही है - ______ यही अधोगति है - ______ इ) पद्‌यांश की तीसरी और चौथी पंक्‍ति का संदेश लिखिए ।

अ)

किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्‍त - स्नेह

हर समय अच्छी लगने वाली बात - प्यार

आ)

अच्छा प्रयत्‍न यही है - गिरे हुए को उठाना

यही अधोगति है - गिरे हुए को न उठाना

इ)

कवि प्रेम का महत्त्व समझाते हुए कहता है कि भले ही कोई हमसे कितना भी सख्त, दूर या नाराज क्यों न हो, किंतु हम अपने अंतर का स्नेह प्रकट करके; उन्हें सहानुभूति देकर, उनके भीतर भी प्रेम की भावना निर्मित कर सकते हैं। कवि कहता है कि जमाना चाहे जितना भी भ्रष्ट हो जाए, किंतु नि:स्वार्थ, पवित्र व सच्चे प्रेम का अस्तित्व व उसकी लोकप्रियता सदैव बनी रहती है। वह हर समय अच्छा लग सकता है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने यह संदेश देना चाहा है कि हमें हर किसी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।

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