Hindi Lokbharati Chapter 16 Barashahin Jalad Solutions

Q1. इनके लिए पद्‌यांश में प्रयुक्‍त शब्‍द :

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Q2. जोड़ियाँ मिलाइए: ‘अ’ समूह उत्‍तर ‘ब’ समूह १. दमकती बिजली अ दुष्‍ट की मित्रता २. नव पल्‍लव से भरा वृक्ष ब साधक के मन का विवेक ३. उपकारी की संपत्ति क ससि संपन्न पृथ्वी ४. भूमि की ड माया से लिपटा जीव

‘अ’ समूह

उत्तर

१. दमकती बिजली

दृष्ट की मित्रता

२. नव पल्लव से भरा वृक्ष

साधक के मन का विवेक

३. उपकारी की संपत्ति

ससि संपन्न पृथ्वी

४. भूमि की

माया से लिपटा जीव

Q3. कृति पूर्ण कीजिए :

Diagram: Refer textbook

Q4. निम्‍न अर्थ को स्‍पष्‍ट करने वाली पंक्‍तियाँ लिखिए : कपूत के कारण कुल की हान

जिमि कपूत के उपजे, कुल सदधर्म नसाहिं।

Q5. निम्‍न अर्थ को स्‍पष्‍ट करने वाली पंक्‍तियाँ लिखिए : संतों की सहनशीलता

खल के बचन संत सह जैसे।

Q6. ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ इस सुवचन पर आधारित कहानी लेखन कीजिए।

परोपकार सबसे बड़ा धर्म

रामचरितमानस में तुलसीदास ने लिखा है− 'परहित सरिस धर्म नहीं भाई', जिसका भावार्थ यह है कि दूसरों का हित करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ज्योतिमठ के शंकराचार्य के परम शिष्य का नाम कृष्ण बोधाश्रम था। कृष्ण बोधाश्रम एक बार प्रवास पर निकले। घूमते-घूमते वे एक ऐसी जगह पहुँच गए, जहाँ पिछले पाँच वर्षों से बारिश नहीं हुई थी। उस क्षेत्र के सारे तालाब और कुएँ सूख गए थे। उन्हें पानी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता था।

अपने क्षेत्र में एक संन्यासी को आया देख गाँव के सारे लोग कृष्ण बोधाश्रम के पास पहुँचे। गाँववालों ने कृष्ण बोधाश्रम को अपनी परेशानी बताई और विनती करके बोले,’महाराज जी इस दुविधा से निपटने के लिए कोई उपाय बताएँ।“ कृष्ण बोधाश्रम ने मुसकुराकर कहा, ’पुण्य करोगे तो भगवान जरूर प्रसन्न होंगे।“ गाँववालों ने कहा,’स्वामी जी हम लोग क्या पुण्य करें? इस भीषण समस्या के कारण हमें तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। कृपा करके आप ही कोई मार्ग दिखाएँ।“ कृष्ण बोधाश्रम जी ने कहा, ’सामने जो तालाब दिख रहा है, उसमें पानी नहीं है, जिसके कारण उस तालाब की मछलियाँ प्यास से मर रही हैं। तुम लोग उस तालाब में पानी डालो और प्यास से मर रही मछलियों को बचा लो।“

गाँववालों ने कहा, "स्वामी जी हम लोगों के पास पीने के लिए भी पानी नहीं है। ऐसे में इन मछलियों के लिए हम पानी कहाँ से लाएँ?“ स्वामी जी ने कहा,’कहीं दूर से भी पानी लाना पड़े, तो लेकर आओ और उस तालाब में डालो।“ सभी लोगों ने दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाकर उस तालाब में डालना शुरू किया।

दो-चार दिनों तक ऐसा चलता रहा। ईश्वर की ऐसी कृपा हुई की उसी सप्ताह में घनघोर बारिश शुरू हो गई। लगातार बारिश होने से उस क्षेत्र में सूखे की स्थिति समाप्त हो गई और वहाँ के तालाबों में भरपूर पानी एकत्रित हो गया। अब तक संन्यासी गाँव से जा चुके थे, लेकिन गाँववालों को समझ में यह बात आ चुकी थी कि दूसरों की मदद करने वालों की मदद ईश्वर स्वयं करते हैं। इस घटना के बाद उस क्षेत्र के लोगों ने परहित का मार्ग अपना लिया और इससे सारा क्षेत्र खुशहाल बन गया।

सीख: दूसरों की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

Q7. बरषहिं जलद पाठ से प्रस्‍तुत पद्‌यांश से अपनी पसंद की किन्हीं चार पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए। कबहुँ प्रबल बह मारुत, जहँ-तहँ मेघ बिलाहिं । जिमि कपूत के उपजे, कुल सद्धर्म नसाहिं ।। कबहुँ दिवस महँ निबिड़ तम, कबहुँक प्रगट पतंग । बिनसइ-उपजइ ग्‍यान जिमि, पाइ कुसंग-सुसंग ।।

कभी तेज हवा चलने से बादल इधर-उधर उड़ जाते हैं, उसी तरह शक्ति का दुरुपयोग चीज़ों को अस्त-व्यस्त कर देता है।

जैसे बुरा पुत्र पूरे कुल की प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है, वैसे ही गलत दिशा में गया व्यक्ति अपने समाज का नुकसान करता है।

कभी दिन में घना अंधेरा छा जाता है और कभी अचानक प्रकाश हो जाता है, ठीक उसी तरह जीवन में सुख-दुख, अज्ञान-ज्ञान आते-जाते रहते हैं।

जैसे मनुष्य का ज्ञान अच्छी या बुरी संगति से नष्ट या विकसित होता है, वैसे ही संगति का प्रभाव जीवन पर बहुत गहरा होता है।

Q8. तालिका पूर्ण कीजिए : इन्हें यह कहा है (१) ______ बटु समुदाय (२) सज्‍जनों के सद्गुण ______

इन्हें यह कहा है
(१) दादूर बटु समुदाय
(२) सज्‍जनों के सद्गुण तालाब में जल भरना

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