Q1. कुरते के प्रसंग से शास्त्री जी के इन गुणों (स्वभाव) का पता चलता है : ______ ______
किफायत से रहना
खादी के कपड़ों से लगाओ
Updated on: 2026-03-31 | Author: SSC Solutions Editorial Team
किफायत से रहना
खादी के कपड़ों से लगाओ
आचार्य अपने शिष्यों से मिलना चाहते थे।
बूढ़े, लड़के और कुछ स्त्रियाँ कुएँ पर पानी भर रहे थे।
डॉ. महादेव साहा ने बाजार से नई पुस्तक खरीदी।
घर में तख्ते के रखे जाने की आवाज आती है।
गोवा के बीच पर घूमने में बड़ा मजा आया।
करामत अली गाय अपने घर लाया।
लड़का, पिता जी और माँ बाजार गए।
लड़के की तरफ मुखातिब होकर रामस्वरूप ने कुछ कहना चाहा।
लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी।
लेखक गोवा गए, उनके साथ साढू साहब भी थे।
मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ।
सिरचन के कोई लड़का-लड़की नहीं थे।
उसे गाय की पीठ पर डंडे बरसाने नहीं चाहिए थे।
एकता में शक्ति होती है।
शिवपुर नामक एक गाँव था। गाँव के सभी लोग एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहते थे। गाँव के लोग लड़का-लड़की में भेद नहीं करते थे। गाँव की सभी लड़कियों को लड़कों की ही भाँति शिक्षा का समान अवसर परिवार द्वारा दिया जाता था। गाँव में विद्यालय जाने वाले लड़कों की संख्या लड़कियों की अपेक्षाकृत बहुत कम थी। गाँव में हर तरह की सुविधा तो थी, लेकिन पानी का अभाव था। गाँव की लड़कियाँ घर के कामों में भी सहायता करती थीं। उन्हें पीने के लिए बहुत दूर से पानी लाना पड़ता था इससे उन्हें पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिलता था। वे सभी इस समस्या को सुलझाने का उपाय खोजने लगीं। एक दिन सभी लड़कियाँ एकजुट होकर इस परेशानी को सुलझाने के लिए चर्चा कर रही थीं। उनमें से एक ने कहा, यदि हमारे गाँव में तालाब या कोई अन्य जलस्रोत होता तो हमें पानी लाने दूर तक नहीं जाना पड़ता। अत: मेरे विचार से हमें गाँव में ही एक बड़े-से तालाब की खुदाई करवानी चाहिए। इसमें वर्षा का जल एकत्रित होगा, जिसका उपयोग हम कर सकते हैं। इसके अलावा तालाब के कारण हमारे गाँव की धरती में भी पानी का स्तर धीरे-धीरे बढ़ जाएगा। इसका हमें आने वाले भविष्य में बहुत फायदा होगा। सभी लड़कियाँ समस्या का उपाय प्राप्त कर चुकी थीं। उन्होंने गाँववालों को इस संदर्भ में समझाया। गाँववालों को भी यह योजना सही लगी। गाँववालों की सहायता से लड़कियाँ इस अनोखे प्रयोग में जुट गई। जल्द ही गाँववालों के कठोर परिश्रम से गाँव में दो बड़े तालाबों की खुदाई पूरी हुई। अब सभी को इंतजार था वर्षा ऋतु का।
कुछ समय बाद वर्षा ऋतु की शुरुआत हुई। उस वर्ष झमाझम वर्षा हुई। गाँव के दोनों तालाब लबालब भरकर बहने लगे। गाँव में जल की समस्या का निदान हुआ। दो-तीन वर्षों में गाँव की धरती के जलस्तर में भी काफी सुधार आया। इसके बाद गाँव में एक सार्वजनिक नलकूप लगवाया गया। लड़कियों का प्रयोग सफल हुआ और सारा गाँव खुशहाल हो गया।
सीख: मिल-जुलकर काम करने से कोई भी मुश्किल काम आसान हो सकता है।
सामने शेर देखकर यात्री के प्राण मानो मुरझा गए।
बरसों बाद पंडित जी को मित्र के दर्शन हुए।
टिळक जी का एक सज्जन के साथ किया हुआ व्यवहार बराबर था।
कन्हैयालाल मिश्र जी बिड़ला की पुस्तक पढ़ने लगे।
करामत अली की आँखों में आँसू उतर आए।
करामत अली ने रमजानी पर गाय की देखभाल की जिम्मेदारी साैंपी।
रंगीन फूलों की माला बहुत सुंदर लग रही थी।
'ईमानदारी की प्रतिमूर्ति' पाठ में प्रयुक्त परिमाणों की सूची :
१. चौदह किलोमीटर
२. पाँच ग्राम
स्त्री के सोने-चाँदी, हीरे-मोती के गहने उसके शरीर के बाह्य शृंगारिक गहने होते हैं। ये गहने स्थायी नहीं होते। स्त्री का असली गहना तो उसका पति होता है, जो जीवन भर उसका साथ निभाता है।
पर-अर्थ : पक्षी का पंख, डैना।
वाक्य : गिद्ध के पर बहुत बड़े और भारी होते हैं।
पर-अर्थ : लेकिन, परंतु।
वाक्य : सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी, पर उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
साठ पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से पैसे जमा करवाने का - पिता की यह बात सुनकर दोनों भाई वहाँ रुक नहीं सके। कमरे में जाकर देर तक फूट-फूटकर रोते रहे।
सुबह साढ़े पाँच-पौने छह बजे दरवाजा खटखटाने का - निंद टूटना और बड़ी तेज आवाज में बोलना।
संसार में दो प्रकार के मनुष्य होते हैं। एक वे, जो भौतिक सुखों को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानते हैं। इनके लिए किसी भी तरह धन-दौलत तथा सुख-सुविधा की वस्तुएँ प्राप्त करना अनुचित नहीं होता। दूसरे प्रकार के मनुष्य हर स्थिति में अपने आप को संतुष्ट रखते हैं। ये अपने सीमित साधनों से अपना और अपने परिवार का निर्वाह करते हैं और प्रसन्न रहते हैं। इनका रहन-सहन साधारण ढंग का होता है। विलासितापूर्ण वस्तुएँ इन्हें प्रभावित नहीं कर पातीं। वे केवल जीवनावश्यक वस्तुओं से अपना गुजारा कर लेते हैं, पर ईमानदारी, सच्चरित्रता, सच्चाई, सरलता तथा दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना वे अपने जीवन का आदर्श मानते हैं। हमारे देश के संतों, महात्माओं तथा महापुरुषों का जीवन इसी तरह का रहा है। इन महापुरुषों को जनता आज भी याद करती है और उनका गुणगान करती है। सादा जीवन उच्च विचार को हर युग में हमारे यहाँ मान्यता मिली है और इन्हें अपने जीवन का मूलमंत्र मानकर ही मनुष्य सुखी रह सकता है।
(१) दुख × सुख
(२) बुरा × भला
(३) प्रसन्न × अप्रसन्न
(४) सदुपयोग × दुरुपयोग